शरण शिवयोगी सिद्धरामेश्वर जी का वचन

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बसव को द्वितीय शंभु कहते है।
हम तृतीय शंभू है।
जो खुद को जानता है वह द्वितीय शंभु कहलाते है ।
जो खुद को भूल जाते है वह इहलोक के मानव कहलाते है, कपिलसिद्ध मल्लिकार्जुना ।

वचन का भावार्थ

इस वचन में शरण सिद्धरामैय्या कहते है कि, इस लोक में केवल एकही शंभू नही है। हमारे बसवण्णाही  द्वितीय शंभू है आगे जाकर सिद्धरामेश्वरजी कहते है की हम खुद तृतीय शंभू है । शरण  सिद्धरामेश्वरजी द्वितीय  शंभू की परिभाषा बातलाते है, वो कहते है खुद को जो जानता है वही द्वितीय शंभू है । हे कपिलसिद्ध मल्लिकार्जुना, जो अपने आप को भूल जाते है उसे इहलोक का कहते है।

भाषांतर और भावार्थ लेखन:
अभिषेक देशमाने
‌सोशल मिडिया, वचन अकादमी, पुणे और बसव ब्रिगेड, पश्चिम महाराष्ट्र.

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अभिषेक देशमाने

निमंत्रित लेखक at लिंगायत युवा
वचनसाहित्य आणि शरण साहित्य अभ्यासक.
शरण चरित्र, वचनसाहित्य, लिंगायत धर्म तत्वज्ञान विषयावर त्यांचे अनेक लेख, मुलाखती आणि व्याख्यान प्रसिद्ध झाले आहेत.
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अभिषेक देशमाने

वचनसाहित्य आणि शरण साहित्य अभ्यासक. शरण चरित्र, वचनसाहित्य, लिंगायत धर्म तत्वज्ञान विषयावर त्यांचे अनेक लेख, मुलाखती आणि व्याख्यान प्रसिद्ध झाले आहेत.

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